सत्यम घोटाला मामला, 2009

यह शायद भारत का सबसे बड़ा कारपोरेट घोटाला था जहां मैसर्स सत्यम कम्प्यूटर्स सर्विसिज़ लि. (मैसर्स एस.सी.एस.एल.) ने निवेशकों को 14,162 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है। कम्पनी प्रमुख, रामलिंग राजू और उसके परिवार के सदस्यों ने विभिन्न तरीके अपनाकर लगभग 2,743 करोड़ रुपए के गैर-कानूनी लाभ का अर्जन किया। कपटपूर्ण सेल-इन्वायस के माध्यम से तथा कम्पनी के सांविधिक और आंतरिक लेखा-परीक्षकों की मिलीभगत से बैंक की स्टेटमेंट में जालसाजी करके कम्पनी के राजस्व में वृद्धि दर्शाते हुए इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। कई वर्षों तक बढ़े हुए राजस्व के साथ कम्पनी की वार्षिक वित्तीय विवरण प्रकाशित किए गए जिसके फलस्वरूप बाजार में प्रतिभूतियों का उच्च दर निर्धारित हुआ। इस प्रक्रिया में निर्दोष निवेशकों को कम्पनी में निवेश करने का प्रलोभन दिया गया। घोटाले को छिपाने के लिए रिश्तेदारों की कम्पनियों को अधिग्रहित करने का भी प्रयास किया गया।

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देश को जैसे ही इसके बारे में पता चला, वैसे ही सत्यम मामला भी इस प्रकार के अन्य विभिन्न मामलों की तरह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपा गया। के.अ.ब्यूरो ने मामले की जांच के लिए एक बहु-विषयक अन्वेषण दल (एमडीआईटी) का गठन किया। इस दल ने रात-दिन कठिन परिश्रम करके रिकार्ड 45 दिनों में ही सफलता प्राप्त की जब उसने आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी, छल, कूटरचना और लेखा-असत्यकरण के अपराधों के लिए अपना पहला आरोप-पत्र दायर किया।


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