सीबीआई ने बैंक को 64.57 करोड़ रू. (लगभग) की कथित हानि पहुँचाने पर प्राइवेट फर्म के तत्‍कालीन निदेशकों ; एस.बी.आई. के तत्‍कालीन डी.जी.एम एवं अन्‍यों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस रिलीज
नई दिल्ली, 05.07.2017

के.अ. ब्‍यूरो ने प्राइवेट फर्म के तीन तत्‍कालीन निदेशकों ; कोलकाता की उक्‍त प्राइवेट फर्म ; एस.बी.आई, कोलकाता के तत्‍कालीन डी.जी.एम (एस.एम.ई) ; एस.बी.आई के तत्‍कालीन आर.एम.एम.ई तथा 07 प्राइवेट व्‍यक्त्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420, 468, 471 एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988, की धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(डी) एवं उनके प्रमुख अपराधों के तहत सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत, बिचार भवन, कोलकाता में आरोप पत्र दायर किया।

यह वर्तमान मामला, भारतीय स्‍टेट बैंक, कोलकाता से प्राप्‍त शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ जिसमें एस.बी.आई. के साथ धोखाधड़ी करने के लिए कोलकाता की प्राइवेट निर्माणकर्ता कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशकों ने एस.बी.आई एस.एम.ई बिजनेस यूनिट डिपार्टमेन्‍ट, एल.एच.ओ., कोलकाता के तत्‍कालीन डी.जी.एम (एस.एम.ई) के साथ मिलकर आपराधिक षड़यंत्र रचने का आरोप है तथा इसके अनुसरण में, वर्ष 2009 से वर्ष 2012 की अवधि के दौरान कपटपूर्ण तरीके से समानान्‍तर प्रतिभूति के तौर पर गैर मौजूद सम्‍पत्तियों को गिरवी रखने हेतु बैंक में जाली हक विलेख जमा कर एस.बी.आई, एस.एम.ई (पूर्व एस.एम.आई) भोवानीपोर शाखा, कोलकाता से 64.57 करोड़ रू. (लगभग) राशि का कैश क्रेडिट लिमिट (एफ.बी.डब्‍ल्‍यू.सी.) तथा एल.सी.लिमिट प्राप्‍त कर ली। आरोपी ने कथित रूप से बैंक धनराशि को मंजूर मद में प्रयोग न करके अन्‍य मद में प्रयोग किया तथा पुर्न भुगतान करने में असफल रहा जिससे बैंक को 64.57 करोड़ रू. (लगभग) की कथित हानि हुई।

जॉंच से पता चला कि ऋणी प्राइवेट डेवेलपर्स कम्‍पनी, एक्सिस बैंक, कोलकाता से प्राप्‍त 22 करोड़ रू. (लगभग) की कैश क्रेडिट सीमा का लाभ उठा रही थी। दिनांक 08.06.09 को, उक्‍त प्राइवेट कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशक ने कथित रूप से एक्सिस बैंक लिमिटेड, राष बिहारी अवेन्‍यू शाखा, कोलकाता की बकाया 22 करोड़ रू. की धनराशि के साथ सी.सी.सीमा को 22 करोड़ रू. (लगभग) से 28.50 करोड़ रू. (लगभग) तक की वृद्वि सहित एक्सिस बैंक लिमिटेट से प्राप्‍त ऋणों का भी अधिकार लेने के निवेदन के साथ एस.बी.आई., एस.एम.ई., न्‍यू अलीपुर शाखा, कोलकाता में ऋण हेतु प्रारिम्‍भक आवेदन जमा किया। जॉंच से यह भी पता चला कि समानान्‍तर प्रतिभूति के तौर पर एस.बी.आई., एस.एम.ई. शाखा, भोवानीपुर में जमा किए गए पट्टा विलेख जाली एवं बनावटी हक विलेख के आधार पर की गई थी/ लिखने वाले के पास कोई वाणिज्यिक अधिकार नही थे।

जॉंच के पश्‍चात, आरोप पत्र दायर हुआ।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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