सीबीआई ने बैंक को भारी हानि पहुँचाने के आरोप पर प्राइवेट कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशक ; कुछ बैंक कर्मियों तथा अन्‍यों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस रिलीज
नई दिल्ली, 06.07.2017

सीबीआई ने बैंकों को भारी हानि पहुँचाने के आरोप पर विशेष न्‍यायाधीश, मुम्‍बई के समक्ष अहमदाबाद/ मुम्‍बई की प्राइवेट टेलीकॉम कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशक; उक्‍त प्राइवेट टेलीकॉम कम्‍पनी (इसके निदेशक के माध्‍यम से) ; एस.बी.आई., अहमदाबाद के तत्‍कालीन क्षेत्रीय प्रमुख एवं एस.बी.आई., अहमदाबाद की मिड कारपोरेट क्रेडिट कमेटी के चेयरमैंन ;आई.एफ.बी., एस.बी.आई., बड़ौदा के तत्‍कालीन डी.जी.एम. और एम.सी.सी.सी., अहमदाबाद के सदस्‍य ; एम.सी.सी.सी., अहमदाबाद के तत्‍कालीन सदस्‍य ; एस.बी.आई., विदेशी शाखा,  अहमदाबाद के तत्‍कालीन सहायक उपाध्‍यक्ष तथा ऋण विश्‍लेषक ; गुजरात इन्‍फो पेट्रो लिमिटेड गॉंधीनगर के तत्‍कालीन मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी एवं तीन अन्‍य व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने बैंकों के समूह से प्राप्‍त शिकायत के आधार पर अहमदाबाद/ मुम्‍बई की प्राइवेट टेलीकॉम कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशक के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420, 467, 468, 471 के तहत मामला दर्ज किया जिसमें एस.बी.आई., विजया बैंक एवं केनरा बैंक में जालसाजी करने का आरोप है और इससे बैंकों को 126.40 करोड़ (लगभग) की हानि हुई। उक्‍त प्राइवेट टेलीकॉम कम्‍पनी को कुछ क्रेडिट सुविधाए दी गई जिसमें 126 करोड़ ्रुामलो.एल.वी.वी.ओ.वीरू. (लगभग) के नकद ऋण, सावधि ऋण एवं गैर वित्‍त आधारित सीमा (एल.सी.) शामिल है। उक्‍त निदेशक ने पूर्व के प्रोत्‍साहकों से इस कम्‍पनी का अधिग्रहण किया। ऐसा आगे आरोप था कि इस कम्‍पनी ने देश के दक्षिणी एवं पूर्वी परिक्षेत्र में बी.एस.एन.एल वी.वी.ओ.बी.बी. (वॉयस एण्‍ड विडियों ओवर ब्रांड बैंण्‍ड) का शुभारम्‍भ करने के लिए नीलामी जीती एवं उक्‍त निदेशक ने बैंकों से भारी धनराशि प्राप्‍त करने के लिए प्रोजेक्‍ट की लागत को बढ़ा चढ़ा कर पेश किय। ऐसा भी आरोप था कि किसी भी तरह के कल पुर्जों की वास्‍तव में आपूर्ति नही की गई एवं सहायक कम्‍पनियों का पक्ष लेने के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट्स खोला गया। इन लेटर ऑफ क्रेडिट्स में कथित रूप से कमी की गई एवं धनराशि को बेईमानी से निकाल लिया गया।

सीबीआई ने मामले की जॉंच के दौरान उक्‍त प्राइवेट टेलीकॉम कम्‍पनी के तत्‍कालीन निदेशक को भी दिनांक 12.05.2017 को गिरफ्तार किया।

जॉंच के पश्‍चात, आरोप पत्र दायर हुआ। 

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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