सीबीआई ने व्‍यापम से सम्‍बन्धित अलग-अलग मामलों में कई उम्‍मीदवारों, परनामधारियों तथा मध्‍यस्‍थों के विरूद्ध दो आरोप पत्र दायर किए

प्रेस रिलीज
नई दिल्ली, 06.07.2017

सीबीआई ने व्‍यापम मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, ग्‍वालियर (मध्‍य प्रदेश) के समक्ष एक उम्‍मीदवार के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी तथा मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त परीक्षा अधिनियम,1937 की धारा 3-डी (2)/4 के तहत एक पूरक आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के दिनांक 09.07.2015 व दिनांक 11.09.2015 के आदेश पर उम्‍मीदवार ; मध्‍यस्‍थ व्‍यक्तियों तथा अज्ञात समाधानकर्ता (सोल्‍वर) के विरूद्ध दिनांक 06.08.2015 को मामला दर्ज किया और प्राथमिक रिपोर्ट संख्‍या 132/2015 जो कि झॉंसी रोड, ग्‍वालियर (मध्‍य प्रदेश) में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी, 419, 420, 467, 468 एवं 471 तथा मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त परीक्षा अधिनियम,1937 की धारा 3/4 के तहत पूर्व में दर्ज जॉंच को अपने हाथों में लिया। ऐसा आरोप था कि उम्‍मीदवार ने पी.एम.टी.2009 परीक्षा जिसे व्‍यापम ने आयोजित करवाया था, में परनामधारण के माध्‍यम से अनुचित साधनों के प्रयोग द्वारा कपटपूर्ण तरीके से ग्‍वालियर स्थित मेडिकल कालेज में एम.बी.बी.एस. में प्रवेश लिया। ऐसा भी आरोप था कि पी.एम.टी. 2009 में उम्‍मीदवार को चयनित कराने के लिए उक्‍त परीक्षा में वास्‍तविक उम्‍मीदवार की ओर से अज्ञात परमाधारी शामिल हुआ तथा परिणाम के आधार पर वर्ष 2009 के दौरान ग्‍वालियर स्‍थित उक्‍त मेडिकल कालेज के एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। सीबीआई जॉंच के दौरान विवादित दस्‍तावेजों की फोरेन्सिक विश्‍लेषण ने यह सिद्ध किया कि उम्‍मीदवार परीक्षा में शामिल नही हुआ।

एक अन्‍य मामले में, सीबीआई ने व्‍यापम मामलों के विशेष दण्‍डाधिकारी, ग्‍वालियर, (मध्‍य प्रदेश) के समक्ष 05 उम्‍मीदवारों ;05 परनामधारियों तथा 03 मध्‍यस्‍थों सहित 13 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर दिनांक 17.07.2015 को मामला दर्ज किया एवं मामला जो कि शिकायत के आधार पर विश्‍वविद्यालय पुलिस स्‍टेशन ग्‍वालियर में प्राथमिक रिपोर्ट/ अपराध संख्‍या 270/13 में मध्‍य प्रदेश मान्‍यता प्राप्‍त परीक्षा अधिनियम 3/4 के तहत दिनांक 15.09.2013 को पूर्व में दर्ज था, की जॉंच को अपने हाथों में लिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दिनांक 15.09.2013 को जब ग्‍वालियर स्थित एक स्‍कूल में पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा, 2013 में परीक्षक के तौर पर अपनी ड्यूटी करने के दौरान, उन्‍होने एक उम्‍मीदवार की जॉंच की जो कि रोल नम्‍बर-400033 के साथ वास्‍तविक उम्‍मीदवार की ओर से उपस्थित हो रहा था। उक्‍त उम्‍मीदवार (परनामधारी) के प्रत्‍यक्ष पत्र/ दस्‍तावेजों की जॉंच के दौरान, शिकायतकर्ता ने पाया कि रोल नम्‍बर एवं पहचान पत्र पर चिपकी फोटो मैच नही कर रही थी।

सीबीआई जॉंच से पता चला कि उक्‍त पॉंच उम्‍मीदवार कथित रूप से पी.सी.आर.टी. परीक्षा 2013 में उपस्थित नही हुए तथा मध्‍यस्‍थ व्‍यक्ति की मिलीभगत में, इन्‍होने पॉंच समाधानकर्ता (साल्‍वर) की व्‍यवस्‍था की जो इन उम्‍मीदवारों की ओर से उपस्थित हुए। जॉंच के दौरान, दस्‍तावेजों जैसे ओ.एम.आर. व रासा प्रपत्रों पर उपलब्‍ध हस्‍तलेखनी/ हस्‍ताक्षर तथा निशानी अँगूठा पर विशेषज्ञों ने राय व्‍यक्‍त की और पाया कि उक्‍त उम्‍मीदवार उक्‍त परीक्षा में शमिल नही हुए और आरोपी उम्‍मीदवारों की ओर से उक्‍त समाधानकर्ता (साल्‍वर) उपस्थित हुए।

गहन जॉंच के पश्‍चात, सीबीआई ने दोनो मामलों में आरोप पत्र दायर किया।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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