विजय माल्‍या के प्रत्‍यपर्ण के सन्‍दर्भ में नवीनतम सूचना

प्रेस रिलीज
नई दिल्ली, 06.07.2017

मामला संख्‍या: आरसी बीएसएम 2015 ई 0006 में फ़रार विजय माल्‍या आरोपी है। सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायालय, मुम्‍बई की अदालत संख्‍या-51 के समक्ष दिनांक 24.01.2017 को आरोप पत्र दायर हुआ। अदालत ने दिनांक 31.01.2017 को गिरफ्तारी हेतु गैर जमानती वारन्‍ट जारी किया। विजय माल्‍या के प्रत्‍यपर्ण हेतु निवेदन, दिनांक 09.02.2017को कूटनीतिक माध्‍यम से यू.के. प्राधिकारियों को भेजे गए हैं। विजय माल्‍या, किंगफिसर एयर लाइन्‍स लिमिटेड (के.ए.एल.) तथा के.ए.एल. के कर्मियों के असत्‍यता, गलतबयानी एवं मिथ्‍या प्रस्‍तुति से सम्‍बन्धित सभी प्रमाण यू.के. प्राधिकारियों के भेज दिए गए हैं। यू.के. प्राधिकारियों ने दिनांक 05.07.2017 ये प्रमाण बचाव पक्ष के वकील को दिए।

ऋणदाताओं को धोखा देने के लिए षड़यंत्र के प्रथम दृष्‍टया मामले को सिद्व करने हेतु प्रमाण को अन्तिम रूप देने के लिए क्राउन प्रोजिक्‍यूशन सर्विसेज (सी.पी.एस.) के अभियोजन पक्ष के साथ, भारतीय प्राधिकारियों/ एजेन्सियों ने निकटता से सम्‍बन्‍ध स्‍थापित किया। भारत सरकार के वरिष्‍ठ कर्मियों ने लन्‍दन का दौरा किया तथा मामले के महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों को चिन्हित करने और भारत में आपराधिक कार्यवाही हेतु न्‍याय के हित में शीघ्रता से सुनाई के लिए जोर देने की अवश्‍यकता हेतु एक निर्धारित अवधि के लिए सी.पी.एस. के प्राधिकारियों के साथ बातचीत की।

दिनांक 06.07.2017 को मामला प्रबन्‍धन सुनवाई के दौरान,सी.पी.एस. के प्रमुख वकील मिस्‍टर मार्क समर्स क्‍यू.सी. ने भारत सरकार के निवेदन के आधार पर शीघ्र प्रत्‍यपर्ण सुनवाई हेतु मजबूत मामला बनाया है। भारतीय प्राधिकारियों से उत्‍कृष्‍ट सहयोग मानते हुए मिस्‍टर समर्स ने निवेदित किया कि उनके पास प्रथम दृष्‍टया मामला सिद्व करने हेतु पर्याप्‍त सबूत हैं। जब, अदालत को सुनवाई की तारीख शीघ्र नियत करने के लिए उन्‍होने प्रस्‍ताव दिया तब बचाव पक्ष के वकील ने इसका विरोध किया। वरिष्‍ठ जिला न्‍यायाधीश ने निम्‍न समय सारणी तय की:-

31.07.2017

अभियोजक द्वारा प्रारिम्‍भक वक्‍तव्‍य

11.09.2017

वचाव पक्ष के प्रमाणों को जमा करना

14.09.2017

वचाव पक्ष के प्रमाणों का पुर्नविचार करना

03.11.2017

भारतीय प्राधिकारियों की प्रतिक्रिया

17.11.2017

वचाव पक्ष के वकील द्वारा ढॉंचागत तर्क

04.12.2017

प्रत्‍यपर्ण की सुनवाई

ढॉचागत तर्क, सुनवाई के पूर्व में अदालत को दिए गए लिखित दस्‍तावेज हैं जो कि निविदित किए गए मुद्दो को सारांशित करती है और इस पर प्राधिकारियों को भरोसा हो।

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