बैंक के साथ धोखाधड़ी में कारपोरेशन बैंक के तत्‍कालीन सहायक प्रबन्‍धक को सात वर्ष की कठोर कारावास एवं गैर अनुपातिक सम्‍पत्ति के मामले में हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड के तत्‍कालीन मुख्‍य प्रबन्‍धक को तीन वर्ष के कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 26.07.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, बंगलौर ने पूर्व सहायक प्रबन्‍धक, कारपोरेशन बैंक, तुब्‍बागेरे शाखा, बंगलौर ग्रामीण जिला (कर्नाटक) को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 409, 467, 477-ए तथा भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1)(सी) एवं (डी) के तहत प्रत्‍येक अपराध में 5 लाख रू. जुर्माने सहित सात वर्ष की कठोर कारावास और भारतीय दण्ड संहिता की धारा 471 के तहत एक लाख रू. जुर्माने सहित दो वर्ष की कठोर कारावास की भी सजा सुनाई।

सीबीआई ने एक मामला दर्ज किया जिसमें आरोप है कि सहायक प्रबन्‍धक, कारपोरेशन बैंक, तुब्‍बागेरे शाखा बंगलौर ग्रामीण जिला ने अपने एवं अपनी पत्‍नी के नाम पर क्षेमानिधि नकद प्रमाण पत्र खोलने के उद्देश्‍य से गैर संचालित जनता जमा खातों में अनाधिकृत डेबिट/ क्रेडिट प्रबिष्टियॉं की तथा बिना सहमति या वास्‍तविक सावधि जमा रसीदों के अन्‍य जमाकर्ताओं की सावधि जमा को समय से पूर्व बन्‍द कर दिया। उन्‍होने इस तरह के लेन-देन को बिना चालनों के तैयार किया एवं शाखा के अन्‍य कर्मचारी की यूजर आई.डी. का दुरूपयोग किया तथा इसके अतिरिक्‍त, बैंक के अपने बकाया ऋण का पुर्न भुगतान करने के उद्देश्‍य से कपटपूर्ण तरीके से खोले गए के.सी.सी. जमाओं के लिए स्‍वम् ऋण मंजूर कर दिया। उन्‍होने अपनी पत्‍नी की जानकारी के बिना उनके जाली हस्‍ताक्षर के द्वारा उनके एस.बी. खाते से 90,000 रू. भी निकाल लिया। आरोपी ने 10,71,591 रू. की धनराशि के गबन द्वारा बैंक को भारी हानि पहुँचाई। जॉंच के पश्‍चात, आरो‍पी के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 409, 418, 420, 467, 468, 477-ए तथा भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ पठित धार 13(1)(सी) एवं (डी) के तहत दिनांक 27.02.2015 को आरोप पत्र दायर किया।

एक अन्‍य मामले में, सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, बंगलौर ने तत्‍कालीन मुख्‍य प्रबन्‍धक (आई.एम.एम.), एल.सी.ए.-एल.एस.पी. मण्‍डल, मैसर्स हिन्‍दुस्‍तान एरोनाटिक्‍स, बंगलौर श्री माण्‍डा वरप्रसाद राव को 10 लाख रू. के साथ तीन वर्ष की कठोर कारावास की भी सजा सुनाई।
जॉच से पता चला कि दिनांक 18.07.1997 से 26.10.2004 के दौरान कानपुर, कोरवा, हैदराबाद एवं बंगलौर स्थित वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक, मुख्‍य प्रबन्‍धक सहित विभिन्‍न पदों पर लोक सेवक के तौर पर कार्य करने के दौरान आरोपी ने सम्‍पत्तियॉं या मौद्रिक स्रोत एकत्र किए जो कि उनके आय के ज्ञात स्रोतों से 24,02,006/- रू. तक अधिक था। जॉंच के पश्‍चात, भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ पठित धार 13(1)(ई)  के तहत  दिनांक 07.11.2006 को आरोप पत्र दायर हुआ।

विचारण अदालत ने आरोपियों को कसूरवार पाया व उन्‍हे दोषी ठहराया।

 

 

  

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