बैंक को 24.75 लाख रू. की हानि पहुँचाने पर स्‍टेट बैंक ऑफ इण्डिया के तत्‍कालीन प्रबन्‍धक एवं प्राइवेट व्‍यक्ति को एक लाख रू. जुर्माने के साथ दो वर्ष की सजा

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 02.08.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, एर्नाकुलम (केरल) ने स्‍टेट बैंक ऑफ इण्डिया, अलगप्‍पा नगर शाखा, त्रिचूर के तत्‍कालीन प्रबन्‍धक श्री के. बालासुन्‍दरम् को एक लाख रू. जुर्माने सहित दो वर्ष की साधारण कारावास एवं श्री एम.डी. वेंकिटाचलम् (प्राइवेट व्‍यक्ति) को 50,000 रू. जुर्माने सहित दो वर्ष की साधारण कारावास की  सजा सुनाई।

सीबीआई ने एक मामला दर्ज किया जिसमें आरोप है कि श्री के. बालासुन्‍दरम् ने वर्ष 2001-2002 में स्‍टेट बैंक ऑफ इण्डिया, अलागप्‍पा नगर शाखा, त्रिचूर के प्रबन्‍धक के तौर पर कार्य करने के दौरान प्राइवेट व्‍यक्तियों तथा धनलक्ष्‍मी बैंक (प्राइवेट बैंक), थ्रिसूर के प्रबन्‍धक सहित चार अन्‍य आरोपियों के साथ आपराधिक षड़यंत्र में शामिल हुए एवं निविदाओं के आधार पर दो लक्‍जरी वाहन खरीदने के उद्देश्‍य से 24.75 लाख रू. का ऋण मंजूर कर दिया। प्राइवेट व्‍यक्ति ने निविदा जारी किया एवं मैसर्स शालीमार आटो गैराज के नाम पर एक काल्‍पनिक कम्‍पनी बनाई। तथा वचन-पत्र (लेटर ऑफ अण्‍डरटेकिंग) भी जारी कर दिया कि वे ढाँचा निर्माण का भी कार्य करेगें। एक अन्‍य प्राइवेट व्‍यक्ति ने धनलक्ष्‍मी बैंक, त्रिसूर में मैसर्स शालीमार आटो गैराज हेतु बैंक खाता संख्‍या खोला। तद्नुसार, एस.बी.आई. के प्रबन्‍धक ने ऋण की क्रेडिट क्षमता एवं समानान्‍तर प्रत्‍याभूत का सत्‍यापन किए बिना ही ऋण धनराशि जारी कर दी तथा मोटर कम्‍पनी को ऋण धनराशि का भुगतान भी कर दिया। उक्‍त मोटर कम्‍पनी के प्रबन्‍धक ने ऋण धनराशि की जानकारी होने के पश्‍चात, वाहन को एस.बी.आई. के नाम पर बन्‍धक न रखने के बजाए दो व्‍यक्तियों को वाहन बेच दिया। हालॉंकि, एक वर्ष के पश्‍चात, ऋण धनराशि गैर निष्‍पादित सम्‍पत्ति घोषित हुई। बैंक को 24.75 लाख रू. (लगभग) की हानि हुई। जॉंच के पश्‍चात, आरोप पत्र दायर हुआ।

अदालत ने उक्‍त आरोपी व्‍यक्तियों को दोषी ठहराया तथा धनलक्ष्‍मी बैंक के प्रबन्‍धक को बरी किया। एक प्राइवेट व्‍यक्ति की मृत्‍यु हो गई तथा उन पर आरोप हटा लिया।

 

 

  

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