सीबीआई ने राजदेव रंजन(वरिष्‍ठ पत्रकार) की हत्‍या के मामले में पूर्व संसद सदस्‍य के विरूद्ध पूरक आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 22.08.2017

के.अ.व्‍यूरो ने वरिष्‍ठ पत्रकार श्री राजदेव रंजन की कथित हत्‍या के सम्‍बन्‍ध में पूर्व संसद सदस्‍य एवं सिवान (बिहार) निवासी के विरूद्ध सीबीआई के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 302 एवं शस्‍त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत आज पूरक आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने बिहार सरकार के अनुरोध एवं इसके अतिरिक्‍त भारत सरकार की अधिसूचना के आधार पर दिनांक 15.09.2016 को मामला दर्ज किया और पूर्व में, अज्ञात व्‍यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302/ 120-बी/ 34 व शस्‍त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत सिवान (बिहार) पुलिस स्‍टेशन में दिनांक 13.05.2016 को दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) संख्‍या 362/2016 की जॉंच को अपने हाथों में लिया। प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में ऐसा आरोप था कि दिनांक 13.05.2016 की शाम को श्री राजदेव रंजन (मृतक) को एक फोन आया एवं इसके पश्‍चात, वह हिन्‍दुस्‍तान समाचार पत्र के कार्यालय से निकल गए व स्‍टेशन रोड की तरफ गए। ऐसा आगे आरोप था कि शाम लगभग 7.30 बजे, जब वह स्‍टेशन के नजदीक फल बाजार पहुँचे तो अज्ञात व्‍यक्तियों ने उन्‍हे रोका और उन्‍हे जान से मार दिया। बिहार पुलिस ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 302 व 34 तथा शस्‍त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत दिनांक 20.08.2016 को छ: आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया।

जॉंच के दौरान,सीबीआई ने दिनांक 22.12.2016 को एक अन्‍य आरोपी के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया एवं इसके अतिरिक्‍त जॉंच को जारी रखा।

आगे की जॉंच के दौरान, कुछ मौखिक, दस्‍तावेजी एवं परिस्थिति जन्‍य प्रमाण सामने आए। जॉंच के दौरान सामने आई परिस्थितियों के आलोक में, सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, मुज़फ्फरपुर(बिहार) ने पूर्व संसद सदस्‍य एवं सिवान (बिहार) निवासी को 08 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। सीबीआई ने पूछतॉंछ के लिए दिनांक 29.05.2017 को उक्‍त आरोपी को पुलिस हिरासत में लिया।

जनमानस को याद रहे कि उपर्युक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

 

 

  

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