पश्चिमी कमान के तत्‍कालीन कर्नल को एक लाख रू. के जुर्माने सहित पाँच वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 23.08.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश, चण्‍डीगढ़ ने पश्चिमी कमान के तत्‍कालीन कर्नल श्री बी.एस. गुरया को दोषी ठहराया एवं उन्‍हें एक लाख रू. जुर्माने सहित 05 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 66,94,455.82 रू. मूल्‍य की आरोपी की सम्‍पत्तियों को जब्‍त करने का भी आदेश दिया।

भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(1) (ई) के तहत श्री बी. एस. गुरया, कर्नल, सामान्‍य कर्मचारी (अभियन्‍ता), मुख्‍यालय, पश्चिमी कमान के विरूद्ध दिनांक 06.08.1990  को मामला दर्ज किया। ऐसा आरोप था कि कर्नल गुरया ने 90 लाख रू. (लगभग) की धनराशि की सम्‍पत्ति एकत्र की जो कि उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से गैर अनुपातिक था। जॉंच के पूरा होने के पश्‍चात, सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत, चण्‍डीगढ़ में दिनांक 29.04.1993 को आरोप पत्र दायर किया गया। विचारण अदालत ने दिनांक 06.02.1998 को आरोप तय करने का आदेश दिया, हालॉंकि, तय आरोपों को चुनौति देने के लिए आरोपी ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय, चण्‍डीगढ़ में याचिका दायर की। दिनांक 29.09.1998 को, आरोपी की याचिका माननीय उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा ख़ारिज कर दी गई। तदानुसार, आरोपी ने माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के विरूद्ध माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की।

माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने दिनांक 03.05.1999 के आदेश में मामले के विचारण पर रोक लगा दी। माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने दिनांक  23.07.2007 को विचारण पर से रोक हटा दी एवं इस प्रकार, मई, 2009 में मामले पर नियमित विचारण प्रारम्‍भ हुआ। अभियोजन पक्ष ने इस मामले को सिद्ध करने के लिए 66 गवाहों से जॉंच पड़ताल की तथा बचाव पक्ष ने 76 गवाहों से जॉंच पड़ताल की।

विचारण अदालत ने आरोपी को कसूरवार पाया एवं उन्‍हे दोषी ठहराया।

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