रिश्वत के एक मामले में बीमा कम्पनी के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी को चार वर्ष का सश्रम कारावास।

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 06.09.2017

विशेष न्यायाधीश, सीबीआई मामले, देहरादून (उत्तराखंड) ने श्री शशि कुमार, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड, देहरादून और श्री लोकेश अग्रवाल, गैर-सरकारी व्यक्ति को दोषी करार दिया और उन्हें क्रमशः 15,000/-रुपए एवं 10,000/-रुपए के जुर्माने के साथ चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने एक शिकायत पर दिनांक 24.01.2012 को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 8 के तहत श्री लोकेश अग्रवाल, गैर-सरकारी व्यक्ति, निवासी – करनपुर, देहरादून और श्री शशि कुमार, प्रशासनिक अधिकारी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड, मंडल कार्यालय, देहरादून के विरूद्ध मामला दर्ज़ किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दिनांक 2 सितंबर, 2010 को एक अग्नि दुर्घटना में, उसकी दवाइयों का सारा स्टॉक जल गया और उसके अग्नि दावे के क्रियान्वयन हेतु, श्री शशि कुमार शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी ने श्री लोकेश अग्रवाल (गैर-सरकारी व्यक्ति) के माध्यम से 25,000/-रुपए की रिश्वत की मांग की। सीबीआई ने दिनांक 24.01.2012 को जाल बिछाया एवं श्री लोकेश अग्रवाल को शिकायतकर्ता से 25,000/-रुपए की रिश्वत मांगते एवं स्वीकारते हुए रंगे हाथों पकड़ा। तत्पश्चात्, आपराधिक षडयंत्र के क्रम में, श्री शशि कुमार, प्रशासनिक अधिकारी ने श्री लोकेश अग्रवाल से 25,000/-रुपए की रिश्वत राशि प्राप्त की।

अन्वेषण के पश्चात्, श्री लोकेश अग्रवाल और श्री शशि कुमार, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध दिनांक 09.04.2012 को विशेष न्यायाधीश, सीबीआई, देहरादून के न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7,8,13(2) सपठित धारा 13(1) (डी) के तहत आरोप पत्र दायर किया गया।

विचारण न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाया और उन्हें दोष सिद्ध करार दिया।

 

 

 

  

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