कोआपरेटिव सोसाइ‍टिज दिल्‍ली के रजिस्‍ट्रार कार्यालय मे कार्यरत तत्‍कालीन कार्मिक एवं चार प्राइवेट व्‍यक्तियों को 05 वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 03.11.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, रोहिणी, दिल्‍ली ने पॉंच आरोपी व्‍यक्तियों यथा अशोक कुमार चौहान (प्राइवेट व्‍यक्ति), पीयूष कुमार शर्मा (प्राइवेट व्‍यक्ति), अक्षय कुमार जैन (प्राइवेट व्‍यक्ति), कर्मवीर सिंह (कोआपरेटिव सोसाइटिज दिल्‍ली के रजिस्‍ट्रार कार्यालय में कार्यरत तत्‍कालीन कार्य सहायक), तथा विजय सिंह लूनीया (प्राइवेट व्‍यक्ति) को भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420,468, 471 तथा भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) एवं साथ पठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी ठहराया और उन्‍हे संगत धाराओं के तहत भारी जुर्माने के साथ 05 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने बड़े पैमाने पर कोआपरेटिव ग्रुप हाऊसिंग सोसाइटी के कपटपूर्ण पुनरूत्‍थान के सम्‍बन्‍ध में मामला दर्ज किया। पूर्व में, माननीय दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर सीबीआई ने प्राथमिक जॉंच पड़ताल की। प्राथमिक जॉंच पड़ताल की अवधि के दौरान, ऐसा पाया गया कि भगवती कोअपरेटिज ग्रुप हाऊसिंग सोसाइटिज (सी.जी.एच.एस.) को कोआपरेटिव सोसाइटिज, दिल्‍ली के पंजीयक के द्वारा दिनांक 25.04.1990 के आदेश पर रोका गया क्‍योंकि इनको सामान्‍यत: नियमों, अधिनियमों एवं लोक हित के अनुसार कार्य करता नही पाया गया। उक्‍त सोसाइटिज ने आवश्‍यक दस्‍तावेजों, सदस्‍यों की सूची आदि को पेश करने हेतु कोआपरेटिव सोसाइटिज के पंजीयक से प्राप्‍त विभिन्‍न पत्राचारों का जबाव नही दिया। हालॉंकि, दिनांक 12.06.1997 के आदेश के द्वारा, उक्‍त सोसाइटी को आर.सी.एस. द्वारा पुनर्जीवित किया गया। इस तरह के पुनरूत्‍थान एवं सदस्‍यों की निष्क्रिय सूची की संस्‍तुति के आधार पर द भगवती सी.जी.एच.एस. ने इस तरह की सोसाइटिज के लिए निश्चित दर पर डी.डी.ए. द्वारा आवंटित सेक्‍टर-22, द्वारका में 17,000 वर्ग मीटर माप का भू-खण्‍ड प्राप्‍त किया।

जॉंच के पश्‍चात, दिनांक 30.12.2008 को 10 आरोपी व्‍यक्तियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर हुआ। विचारण अदालत ने पॉंच आरोपियों को कसूरवार पाया तथा तीन व्‍यक्तियों को बरी/ आरोप मुक्‍त किया। विचारण के दौरान दो व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हो गई।

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