केरल में ऋण भुगतान से सम्‍बन्धित धोखाधड़ी के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के प्रबन्‍धक एवं 12 अन्‍य को सजा

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 18.12.2017

सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, एर्नाकुलम (केरल) ने यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया, चेरयू शाखा, त्रिचूर (केरल) के तत्‍कालीन वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक श्री के.के. विस्‍वम्‍बरन को दो लाख रू. के जुर्माने सहित तीन वर्ष की साधारण कारावास एवं 12 प्राइवेट व्‍यक्तियों यथा श्री के.एन. रविन्‍द्रन ; श्रीमति हेमलता ; श्री टी.डी. किशोर कुमार ; श्री सन्‍तोष जोस ; श्रीमति ए. रेमानी ; श्रीमति गोवरी ; श्री वी.एस. सुरेश बाबू ; श्रीमति सजीथा ; श्रीमति मिनी सन्‍तोष ; श्री सी.सी. जाय ; श्री के.टी. थॉमस एवं श्री जी. ज्‍योथि को एक लाख रू. प्रत्‍येक पर जुर्माने सहित 02 वर्ष की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

जॉंच से पता चला कि श्री के.के. विस्‍वम्‍बरन, यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया, चेरयू शाखा, जिला त्रिचूर, केरल के तत्‍कालीन वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक के तौर पर कार्य करने के दौरान वर्ष 2004-2005 के मध्‍य अन्‍य प्राइवेट व्‍यक्तियों के साथ आपराधिक षड़यंत्र में शामिल हुए और गृह ऋण को पास/ भुगतान  करने के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया को धोखा दिया। आरोपी ने ऋण पास करने के पूर्व के सत्‍यापन को ठीक ढंग से किए बिना ही ऋणियों को गृह ऋण राशि पास एवं भुगतान कर दी और जाली आयकर रिटर्न स्‍वीकार की। इससे यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया को 49.5 लाख रू. की हानि हुई। अन्‍य आरोपियों ने ऋणों के लिए व्‍यक्तियों की उनकी अक्षमता, उक्‍त ऋण का पुर्न भुगतान करने की क्षमता पर विचार किए बिना ही ऋणियों के नाम पर जाली आयकर रिटर्न तैयार करने, जाली मुहर लगाने और कम्‍प्‍यूटर स्‍कैनिंग विधि का प्रयोग कर जाली आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि को अंकित करने की सुविधा प्रदान की।

जॉंच के पश्‍चात, सीबीआई ने आरोपियों के विरूद्ध नामित अदालत में आरोप पत्र दायर किया। विचारण के दौरान एक आरोपी की मृत्‍यु हो गई और उनके विरूद्ध आरोप हटा लिए गए।

विचारण अदालत ने उक्‍त आरोपी व्‍यक्तियों को दोषी ठहराया एवं एक व्‍यक्त्‍िा को बरी किया।

 

 

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