को-आपरेटिव सोसाइटीज, दिल्ली के तत्कालीन रजिस्ट्रासर सहित छ: आरोपियों को एक को-आपरेटिव ग्रुप हाऊसिंग सोसाइटी को कपटपूर्ण तरीके से पुनर्जीवित करने से सम्बेन्धित मामले में तीन से सात वर्ष की कठोर कारावास

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 04.01.2018

सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, रोहिणी, दिल्लीख ने आज को-आपरेटिव सोसाइटीज, दिल्लीा के तत्काॉलीन रजिस्ट्राेर श्री नारायण दिवाकर, आई.ए.एस. (सेवानिवृत) को पॉंच लाख रू. जुर्माने सहित पॉंच वर्ष की कठोर कारावास तथा तत्काीलीन चार कर्मियों यथा उमेश चन्द्रे भटनागर, फैज मुहम्म द, एन.एस. खत्री व प्रहलाद कुमार थिरवानी को प्रत्येशक पर 02 लाख रू. जुर्माने सहित 03 वर्ष की कठोर कारावास और एक प्राइवेट व्यिक्ति श्री गोकुल चन्द्रर अग्रवाल को 2.50 लाख रू. जुर्माने सहित 07 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई ने को-आपरेटिव ग्रुप हाऊसिंग सोसाइटी को कपटपूर्ण तरीके से बड़े पैमाने पर पुनर्जीवित करने से सम्बएन्धित मामले में माननीय दिल्ली उच्ची न्या यालय के आदेश पर मामला दर्ज किया। इस मामले में, ऐसा पाया गया कि सर्विस ऑफिसर्स सी.जी.एच.एस. लिमिटेड का दिनांक 23.11.1973 को पंजीकृत किया गया एवं को-आपरेटिव सोसाइटिज के रजिस्ट्रा र ने दिनांक 16.05.1979 के आदेश के द्वारा इसका पंजीकरण समाप्तत किया गया क्योटकि यह सामान्यकत: नियमों और विनियमनों तथा जनमानस के कल्यालण के अनुरूप कार्य करती नही पायी गई थी। जॉंच से पता चला कि आरोपी व्यकक्तियों ने आपराधिक षड़यंत्र में हिस्सा लिया एवं कपटपूर्ण-तरीके से दिनांक 03.02.2004 के आर.सी.एस. आदेश के द्वारा उक्त सोसाइटी को पुनर्जीवित करवा लिया। इस तरह के पुनर्जीवन एवं सदस्यों की निष्क्रिय सूची के अनुमोदन के आधार पर सर्विस ऑफिसर्स सी.जी.एच.एस. ने इस तरह कि सोसाईटियों हेतु डी.डी.ए. द्वारा आवंटित भूमि को निर्धारित मूल्यि पर प्राप्ते कर लिया।

गहन जॉंच के पश्चा9त, सीबीआई ने आरोपी व्यआक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्डर संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420, 465, 468, 471, व भ्रष्टााचार निवारण अधिनियम,1988 की धारा 13(2) व 13(1)(डी) के तहत आरोप पत्र दायर किया।

विचारण अदालत ने आरोपियों को कसूरवार पाया व उन्हे2 दोषी ठहराया।

 

********