सीबीआई ने कुछ लोगों को कथित रूप से नपुंसक बनाने के सन्‍दर्भ में सिरसा स्थित एक धार्मिक संगठन के तत्‍कालीन प्रमुख/ प्रधान एवं दो डाक्‍टरों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 01.02.2018

सीबीआई ने कुछ लोगों को कथित रूप से नपुंसक बनाने के सन्‍दर्भ में सिरसा (हरियाणा) स्थित एक धार्मिक संगठन (डेरा) के तत्‍कालीन प्रमुख/ प्रधान एवं दो डाक्‍टरों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326, 417 एवं 506 के तहत सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी की अदालत, पंचकूला (हरियाणा) में आज आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर उक्‍त धार्मिक संगठन के कुछ लोगों को कथित रूप से नपुंसक बनाने के सन्‍दर्भ में सिरसा (हरियाणा) स्थित एक धार्मिक संगठन (डेरा) के प्रमुख/ प्रधान तथा अन्‍यों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी, 326, 417 व 506 के तहत दिनांक 07.01.2015 को मामला दर्ज किया। सिरसा स्थित उक्‍त धार्मिक स्‍थल के एक अनुयायी द्वारा अपनी नपुंसकता के लिए मुआवजा एवं सीबीआई जॉंच की मॉंग को लेकर वर्ष 2012 में सिविल समादेश याचिका संख्‍या 13395, माननीय उच्‍च न्‍यायालय में दायर किया। याची ने आरोप लगाया कि याची सहित हरियाणा,पंजाब, राजस्‍थान आदि से सम्‍बद्ध लगभग 400 पुरूष लोगों को उक्‍त धार्मिक स्‍थल के प्रमुख द्वारा किए गए छूठे दावें, जिसमें नपुंसकता द्वारा उनके माध्‍यम से ईश्‍वर के दर्शन होगें, के प्रभाव में उक्‍त स्‍थान पर नपुंसक बना दिया गया एवं इस प्रकार, ऐसा भी आरोप लगाया गया कि उक्‍त संगठन के प्रमुख/ प्रधान के आदेश पर आपरेशन के माध्‍यम से उन्‍हें नपुंसक बना दिया गया।

शेष लोगों, जिन्‍हे कथित रूप से नपुंसक बना दिया गया था, के सन्‍दर्भ में आगे की जॉंच को आपराधिक दण्‍ड संहिता की धारा 173(8) के तहत जारी रखा गया है।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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