सीबीआई ने गुड़गॉव जिले में तथाकथित भूमि घोटाले के सम्‍बन्‍ध में हरियाणा के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री ; तत्‍कालीन प्रमुख सचिव एवं अन्‍यों सहित 34 आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली, 02.02.2018

सीबीआई ने गुड़गॉंव जिले में भूमि घोटाले के सम्‍बन्‍ध में हरियाणा के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री ; मुख्‍यमंत्री के तत्‍कालीन प्रमुख सचिव (आई.ए.एस. अधिकारी, वर्तमान में सेवानिवृत्‍त) ; मुख्‍यमंत्री के तत्‍कालीन अतिरिक्‍त प्रमुख सचिव/ प्रमुख सचिव (आई.ए.एस. अधिकारी, वर्तमान में सेवानिवृत्‍त) ; नगर एवं ग्रामीण योजना के तत्‍कालीन जिला नगर योजनकर्ता (मुख्‍यालय) ; रजोकरी, नई दिल्‍ली स्थित इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्राइवेट कम्‍पनी के निदेशक ; अन्‍य प्राइवेट विल्‍डर्स ; प्राइवेट बिल्‍डरों की भू-स्‍वामित्‍व वाली 23 कम्‍पनियों एवं अन्‍य व्‍यक्तियों सहित 34 आरोपियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित धारा 420, 471 एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(2) के साथ पठित धारा (1)(डी) एवं उनके प्रमुख अपराधों के तहत सीबीआई मामलों के विशेष न्‍यायाधीश की अदालत, पंचकूला (हरियाणा) में आरोप पत्र दायर किया।

सीबीआई ने दिनांक 15.09.2015 को मामला दर्ज किया तथा हरियाणा सरकार के निवेदन पर मानेसर पुलिस स्‍टेशन, जिला गुड़गॉंव में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468,471 व 120-बी तथा भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 के तहत दिनांक 12.08.2015 को दर्ज प्राथमिक सूचना रिर्पोट की जॉंच को अपने हाथों में लिया। ऐसा आरोप था कि हरियाणा सरकार ने जिला गुड़गॉंव स्थित गॉंव मानेसर, नौरंगपुर एवं लखनौला में इण्‍डस्‍ट्रीयल मॉडल टाउन को स्‍थापित करने के लिए लगभग 912 एकड़ भूमि के अधिग्रहण हेतु भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत दिनांक 27.08.2004 को धारा 4 एवं दिनांक 25.08.2005 को धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी की। ऐसा आगे आरोप था कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी होने के पश्‍चात अगस्‍त 2004 से अगस्‍त 2007 के दौरान प्राइवेट बिल्‍डरों ने महत्‍वपूर्ण पदाधिकारियों सहित हरियाणा सरकार के कुछ लोक सेवकों एवं अन्‍यों के साथ षड़यंत्र में गॉव मानेसर, नौरंगपुर, लखनौला, जिला गुड़गॉव के किसानों व भू-स्‍वामियों से सराकार द्वारा अधिग्रहण की धमकी तथा झूठी आशंका के आधार पर लगभग 400 एकड़ भूमि कौडि़यों के भाव खरीदा। उक्‍त आपराधिक षड़यंत्र के परिणाम स्‍वरूप, बड़े पैमाने पर भू-स्‍वामिओं ने जल्‍द बाजी में रूपया 20/25 लाख (लगभग) प्रति एकड़ के कौडि़यों के भाव में लगभग 350 एकड़ भूमि बेच दी। ऐसा भी आरोप था कि जब किसानों के द्वारा कुछ भूमि नही बेची गई तब सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 9 के तहत अधिसूचना जारी की और इसके पश्‍चात, प्राइवेट बिल्‍डरों ने 1.50 करोड़ रू. (लगभग) प्रति एकड़ तक की 50 एकड़ (लगभग) की एक अन्‍य भूमि खरीदी। ऐसा आगे आरोप था कि जब उक्‍त सम्‍पत्तियों को मामूली दर पर अधिग्रहण का भय दिखा कर भू-माफिया के द्वारा भू-स्‍वामियों से हड़प लिया गया तब दिनांक 24.08.2007 को इस भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से मुक्‍त करने का आदेश पारित हुआ। इसके अतिरिक्‍त, इस भूमि को वास्‍तविक भू-स्‍वामिओं के बजाए बिल्‍डरों, उनकी कम्‍पनियों एवं एजेन्‍टों के पक्ष में सरकार की नीति के उल्‍लंघन में जारी किया गया। 400 एकड़ से ज्‍यादा की भूमि, जिसका बाजार भाव उस समय 4 करोड़ रू. (लगभग) प्रति एकड़ से ज्‍यादा, कुल लगभग 1600 करोड़ रू. (लगभग) था, को इस प्रकार कथित रूप से उक्‍त षड़यंत्रकारियों के द्वारा भोले-भाले भू-स्‍वामियों से केवल 100 करोड़ रू. (लगभग) में खरीद लिया गया। इससे जिला गुड़गॉव स्थित गॉंव मानेसर, नौरंगपुर एवं लखनौला के भू-स्‍वामिओं को 1500 करोड़ रू. से भी ज्‍यादा की कथित हानि हुई।

जॉंच से पता चला कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी होने के पश्‍चात, प्राइवेट बिल्‍डरों एवं अन्‍य व्‍यक्तियों ने सरकार के द्वारा अधिग्रहण की धमकी एवं झूठी आशंका के आधार पर ग्रामीणों से लगभग 459 एकड़ भूमि को खरीद लिया। ऐसा भी आरोप था कि उन लोगों ने तब नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग, हरियाणा में ग्रुप हाऊसिंग कालोनियों एवं अन्‍य प्रोजेक्‍टों के विकास हेतु लाइसेन्‍स अनुदान के लिए आवेदन किया। कर्मियों ने कथित रूप से भूमि के अधिग्रहण के सन्‍दर्भ में आवंटन की घोषणा, यह जानते हुए, कि प्राइवेट बिल्‍डर्स लाइसेन्‍स अनुदान के लिए योग्‍य नही थे, क्‍योकि उन्‍होने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत जारी अधिसूचना के पश्‍चात भूमि खरीदी थी, बिलम्बित की। उन्‍हे लाइसेन्‍स अनुदान हेतु योग्‍य बनाने के लिए, लोक सेवकों ने कथित रूप से अधिग्रहण की प्रक्रिया छोड़ दी एवं दिनांक 24.08.2007 को इस तरह का आदेश पारित किया। जॉंच से यह भी पता चला कि यह निर्णय प्राइवेट बिल्‍डरों के द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्‍व पर लिया गया, जिसमें कुछ ग्रामीणों के कथित जाली हस्‍ताक्षर शामिल थे। इसके पश्‍चात, लाइसेन्‍स एवं सी.एल.यू., 260 एकड़ (लगभग) भूमि को उक्‍त प्राइवेट बिल्‍डरों, जिन्‍होने राज्‍य द्वारा प्रेरित जल्‍दबाजी में की जाने वाली बिक्री के दौरान मामूली दामों पर पूर्व में भूमि की खरीद की थी, को कथित रूप से अनुदानित कर दिया गया।

जाँच के पश्‍चात, आरोप पत्र दायर हुआ।

जनमानस को याद रहे कि उपरोक्‍त विवरण सीबीआई द्धारा की गयी जॉंच व इसके द्धारा एकत्र किये गये तथ्‍यों पर आधरित है। भारतीय कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जायेगा जब तक कि उचित विचारण के पश्‍चात दोष सिद्ध नही हो जाता।

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